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Rajat Sharma's Blog | नेपाल में चमत्कार : क्या हुआ, कैसे हुआ?

 Written By: Rajat Sharma
 Published : Sep 05, 2026 04:07 pm IST,  Updated : Sep 05, 2026 04:11 pm IST

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने कई जिंदगियां लील लीं, तो वहीं कई लोग अबतक लापता हैं। जन्माष्टमी के दिन 170 मीटर की गहराई में बनी सुरंग के भीतर दस दिन से फंसे दो पनबिजली कर्मियों को जिंदा बाहर निकाला गया। आखिर ये चमत्कार कैसे हुआ, ऐसा क्या हुआ? जानिए।

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इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा। Image Source : INDIA TV

कन्हैया के जन्म दिन पर नेपाल में चमत्कार हुआ। नेपाल में 170 मीटर की गहराई में बनी सुरंग के भीतर दस दिन से फंसे दो पनबिजली कर्मियों को कल जिंदा बाहर निकाला गया, जहां सूरज की रोशनी भी नहीं पहुंच रही थी, पूरी सुरंग में कीचड़ भरा था, न पीने को पानी था, न खाना, न सांस लेने को हवा, ऐसे में भी दस दिन तक जिंदा बचे रहना, किसी चमत्कार से कम नहीं हैं। जिस जगह तक पहुंचने में बचाव दल दस दिन तक दिन रात मेहनत करने के बाद भी एक छोटा सा रास्ता बना पाया, वहां कोई इंसान दस दिन तक जिंदा कैसे रहा, ये सोचकर रेस्क्यू ऑपरेशन्स के एक्सपर्ट्स भी हैरान हैं। लेकिन जो लोग बचे, उनका कहना है कि सब प्रभु की माया है। वो दस दिन तक महामंत्र हरे कृष्ण का जाप करते रहे और ईश्वर की कृपा से उन्हें नई जिंदगी मिली। अब बचाव दल की उम्मीद जगी है क्योंकि इसी सुरंग में अभी कम से कम चालीस लोग और फंसे हैं. बचाव का काम और तेज कर दिया गया है. क्योंकि हो सकता है, फिर चमत्कार हो।

तीस साल के संजय साह को दस दिन के बाद कीचड़ और मलबे से भरी टनल से सुरक्षित बाहर निकाला गया और उसके बाद 45 साल के कबीर महर्जन भी सही सलामत निकले। ये लोग 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद से ही त्रिशूली 3-A टनल में फंसे थे। न किसी को इनकी लोकेशन मालूम थी, न किसी तरह का कोई संपर्क था। किसी को ये भी नहीं पता था कि सुरंग के भीतर फंसे लोगों में कोई जिंदा भी है या नहीं। दस दिन बीत चुके थे, टनल में न हवा थी, न पानी, न खाना था। लेकिन संजय शाह और कबीर महर्जन के पास जीने की अदम्य इच्छा और भगवान पर भरोसा था। इसी के सहारे इन लोगों की सांसे चलती रहीं.. ये दोनों नेपाल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के कर्मचारी हैं। संजय साह मैकेनिकल फोरमैन हैं और कबीर महर्जन मैकेनिकल सुपरवाइज़र, संजय साह त्रिशूली 3-A हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट के कंट्रोल रूम में

काम कर रहे थे। कंट्रोल रूम में होने की वजह से खतरे की चेतावनी सबसे पहले उन्हें ही मिली. संजय शाह के पास भागने का वक्त था लेकिन उन्होंने अपने साथियों को आगाह किया, उन्हें बाहर जाने को कहा, बहुत से लोग निकल गए, लेकिन जब तक संजय शाह सुरंग से निकलते, तब तक देर हो चुकी थी। पूरी सुरंग में कीचड़ और भारी भरकम पत्थरों का मलबा भर चुका था। दस दिन बाद संजय साह ने सूरज की रोशनी देखी। हैरानी की बात ये है कि संजय के शरीर के सारे vital parameters ठीक थे लेकिन दस दिन भूखा-प्यासा रहने की वजह से वह कमजोर हो गए हैं। संजय ने कहा, मेरे आसपास 6 लोग थे और हम लगातार एक-दूसरे से बात कर रहे थे। इस मुश्किल घड़ी में भी हमने हिम्मत नहीं हारी. .हम लगातार महामंत्र (हरे कृष्ण) का जाप कर रहे थे और भगवान से प्रार्थना कर रहे थे कि हमें बचा दो।

यहां पर सबसे बड़ा सवाल है कि 10 दिन तक सुरंग में फंसे इन दोनों ने कैसे खुद को बचाया। विशेषज्ञों का कहना है कि टनल के जिस हिस्से को मेंटेनेंस के लिए बनाया जाता है, इस ऊपरी हिस्से में जो लोग होंगे, उनके बचे रहने की पूरी संभावना है क्योंकि यहां एयर का फ्लो बना रहता है। नेपाल के हाईड्रो पावर प्रोजेक्ट की तीन सुरंगों में मलबा भरा है, यहां रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा है। नेपाली सेना, भारतीय सेना, चीनी और कोरियन सेनाओं  के लोग इस बचाव अभियान में लगे हैं। ऑस्ट्रेलियन जियोलॉजिस्ट अर्नोल्ड डिक्स की मदद भी ली गई है। अर्नोल्ड डिक्स वही इंजीनियर हैं, जिन्होंने उत्तराखंड की सिल्क्यारा सुरंग में फंसे 41 मजदूरों को निकालने वाली टीम का नेतृत्व किया था। अर्नोल्ड ने कहा कि जो दो लोग टनल से सुरक्षित निकले वो टनल के गोल्डलॉक्स जोन में थे, क्योंकि किसी दुर्घटना के वक्त यही जोन सबसे सुरक्षित होता है। गोल्डलॉक्स जोन टनल के सबसे ऊपरी हिस्से में होता है। इसे इस तरह डिजायन किया जाता है जिससे अंदर की हालत जीने के लिए योग्य हो। रेस्क्यूअर्स ने सबसे पहले इसी जोन तक पहुंचने का रास्ता खोजा।संजय साह और कबीर महर्जन के परिवार वालों को इन टैक्निकल बातों से कोई मतलब नहीं। उन्हें तो बस इस बात की खुशी है कि उनके परिजन सुरक्षित निकल आए और जो लोग टनल में फंसे हैं, उनके जिंदा होने की उम्मीद भी जगी है। इस काम में भारतीय सेना की स्पेशल टनल रेस्क्यू यूनिट की कुशलता बहुत काम आई। नया जीवन पाने वालों ने कहा कि वो लगातार महामंत्र हरे रामा, हरे कृष्णा का जाप कर रहे थे। संयोग देखिए कि कृष्ण जन्माष्टमी के दिन उन्होंने सूरज की किरण देखी, नया जीवन पाया।
 
योगी का वादा : मथुरा, वृंदावन को अयोध्या जैसा चमकाएंगे
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मथुरा के कृष्ण जन्मभूमि मंदिर में जन्माष्टमी मनाई। योगी ने भक्तों पर फूलों की बारिश की, कहा कि वे निश्चिंत हो जाएं, अयोध्या, काशी के बाद अब मथुरा की बारी है। उनकी सरकार अयोध्या, काशी की तरह कृष्ण जन्मभूमि को भी चमकाएगी। योगी ने कहा कि उनकी सरकार ब्रजक्षेत्र में द्वापर युग जैसा ही वैभव लौटाएगी, मथुरा, वृंदावन, गोकुल, बरसाना समेत पूरे ब्रज क्षेत्र का विकास करेगी। योगी ने सनातन विरोधियों पर हमला किया, कहा कि जो औरंगजेब और बाबर के समर्थक हैं, जो हिन्दुओं की आस्था की अनदेखी करते हैं, उन्हें अपने कर्मों का फल मिल रहा है, जनता ने उन्हें गर्त में पहुंचा दिया है। जो सनातन का विरोध करेंगे उन्हें कंस जैसी दुर्गति प्राप्त होगी।
   
जन्माष्टमी के अवसर पर मंदिरों में जिस तरह की धूम है उससे एक बात तो पक्की हो जाती है कि चाहे शिवरात्रि हो, रामनवमी हो या जन्माष्टमी, हर त्योहार पर मंदिरों में जाने वाले भक्तों की संख्या लगातार बढ़ने लगी है। अयोध्या राम मंदिर, काशी विश्वनाथ..महाकाल जैसे मंदिरों का पुनर्निर्माण हुआ है. .व्यवस्था में सुधार हुआ है। वहां कितनी भी भीड़ हो..उसे हैंडल किया जा सकता है, लेकिन मथुरा वृंदावन इस मामले में काफी पीछे हैं। कुछ महीने पहले मैंने भी वृंदावन जा कर बांके बिहारी के दर्शन किए थे। इतनी भीड़ थी कि पार पाना मुश्किल था, मंदिर के रास्ते में बंदरों का डर था। मथुरा और बरसाना की हालत भी अच्छी नहीं है। इसीलिए योगी ने कहा कि पूरे ब्रज क्षेत्र में वैभव की छटा बिखरेगी। अगर इस इलाके का विकास होता है तो ना केवल दुनिया भर से आने वाले भक्तों के लिए भगवान का दर्शन करना आसान हो जाएगा बल्कि इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे, आर्थिक संपन्नता के रास्ते खुलेंगे।
 
पवार परिवार : सुप्रिया, सुनेत्रा ने क्यों एक दूसरे को निशाने पर लिया?
महाराष्ट्र में अब शरद पवार के परिवार के भीतर का टकराव खुल कर सामने आ गया है। शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने कल कहा कि ऐसा लग रहा है जैसे अजित दादा (अजित पवार) की मौत का सच जानने में NCP के नेताओं को कोई दिलचस्पी नहीं है। 28 फरवरी को विमान दुर्घटना में अजित पवार का निधन हो गया था. रोहित पवार और सुप्रिया सुले लगातार इस विमान दुर्घटना पर सवाल उठा रहे हैं, FIR दर्ज कर जांच की मांग कर रहे हैं। सुप्रिया सुले ने कहा कि अजित पवार के निधन के मामले में NCP के सारे नेता खामोश हैं। कोई ये जानने की कोशिश नहीं कर रहा है कि विमान हाजसे की जांच कहां तक पहुंची।सुप्रिया सुले ने कहा कि उन्होंने अपना भाई खोया और अजित पवार की पार्टी के नेता सत्ता का सुख भोगने में मशगूल हैं। सुप्रिया सुले के  बयान पर अजित पवार की पत्नी और महाराष्ट्र की डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार ने कहा कि अजित दादा के निधन पर राजनीति नहीं होनी चाहिए, .जांच एजेंसियों को थोड़ा वक्त तो देना पड़ेगा।

सुनेत्रा ने कहा कि उन्होंने पति खोया है, उनके बेटों ने पिता को खोया है, परिवार का दर्द वही जानती हैं, वो खुद पूरी जांच को मॉनिटर कर रही हैं, इसलिए इस मामले में गलत बातें न की जाए तो बेहतर होगा। सुप्रिया सुले और सुनेत्रा पवार ने बारामती में एक दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ा था। दोनों का झगड़ा पुराना है लेकिन जब तक अजित दादा जिंदा थे उन्होंने परिवार टूटने नहीं दिया, शरद पवार को छोड़कर अपनी पार्टी बना ली लेकिन चाचा से रिश्ते खराब नहीं किए। सुप्रिया ने भी उन्हें हमेशा दादा कहकर पुकारा और कभी उनके खिलाफ कुछ नहीं कहा। महाराष्ट्र में पवार परिवार की एक अच्छी छवि बनी, चाहे राजनीतिक मतभेद हों, पर व्यक्तिगत रिश्ते टूटने नहीं चाहिए लेकिन अब लगता है कि अजित दादा के जाने के बाद पुराने जख्म कुरेदे जा रहे हैं, जो परिवार के लिए अच्छा नहीं है।

देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 04 सितंबर, 2026 का पूरा एपिसोड

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